Hindu Scholar Swami Lakshmi Shankaracharya Praises Prophet Muhammad (PBUH) as Greatest Person In History

Source: http://abna.ir/data.asp?lang=3&id=389868

 Hindu scholar terms Prophet Muhammad (PBUH) greatest person in history, urges to study Prophet’s life for understanding IslamPatna (Ahlul Bayt News Agency) – Islam is a wonderful religion and Prophet of Islam, Hazrat Muhammad (Peace Be Upon Him) is the greatest person in the history of mankind. This claim was not surfaced by a Muslim but said by a well-renowned Hindu scholar in India. He also said that for learning and understanding Islam, Prophet’s (Peace Be Upon Him) life and teachings are the best source.

The Hindu scholar, Swami Lakshmi Shankaracharya, stated, “We are talking about Prophet Muhammad (Peace Be Upon Him) and we should keep it in our mind that he is the greatest individual in history. If anyone wants to know about Islam, one should judge Islam by Prophet’s (Peace Be Upon Him) life and his teachings.”

While delivering a lecture on “Seerat-un-Nabi” (Prophet’s Upright Character) conference held here last month, Swami who is also the founder of Jan Ekta Manch, said that peace and humanity is the core teaching of Islam. But, unfortunately, most of the Muslims don’t follow Islamic teachings and they hardly learn from the life of Prophet Muhammad (Peace Be Upon Him).

He urged, “It is the duty of every Muslim according to their religion to save and protect the humanity, Prophet Muhammed (Peace Be Upon Him) always forgave his enemies and showed patience when he was harmed by others, this was his moral teachings which made Islam an international religion.”

On Jihad, he clarified that it has nothing to do with innocent killings and terrorism.

He also cited extensively from the Veda and Gita to authenticate that Islam’s endeavor to establish peace is not different from what Sanatan scriptures bid.

It is interesting to mention that Swami was initially very critical about Islam and its concept of Jihad. He considered Islam to be the root cause of global terrorism. This thinking had cropped up in his mind because of his study of negative materials on Islam and behavior of some Muslims. Then he wrote a book “The History of Islamic Terrorism.” However, on being urged to study Islam from its original sources Swami read The Holy Quran from cover to cover besides the life of Prophet Muhammad (Peace Be Upon Him). Finally, he realized that he misunderstood Islam. He accepted his mistake and decided to write a rejoinder of such negative materials in a book titled, “Islam – Aatank ya Aadarsh” in Hindi or “Islam – Terror or Ideal Path” in English. In this book, he clarifies the real meaning of Jihad and how Islam is the religion of peace. He concludes that Muslims were enjoined to fight in self-defense to establish peace, without resorting to terror.

The conference was organized by Jamaat-e-Islami Hind, Bihar, and group’s chief of the region, Nayyaruzzaman, presided over the conference. He emphasized on the acquisition of true knowledge of Islam and practicing it as was done by the Prophet’s companions.

11 replies

  1. Wonderful, An eye opener for our Hindu brothers.Most of them do not know about this Greatest Prophet in the history of mankind.(May peace and blessings of Allah be upon him)

  2. आपकी ये साइड अच्छी है, यदि इसका उद्देश इस्लाम के बारे में जानकारी देना है पर यदि आप हिन्दुओं को मुसलमान बनाना चाहतें है तो यह बात उचित नहीं है, आज विश्व को हिंदुत्वा की आवस्यकता है, प्रयत्न इसे समाप्त करने के नहीं प्रयत्न इसे जानने के होना चाहिए. यदि हिंदुत्वा आज विश्व से समाप्त हो जय तो यह मानव जाती की अपूर्व एवं अपूरणीय छाति होगी, इसमे ईश्वर, धर्म, आत्मा, परमात्मा, श्रष्टि, जीवन, जीवन का अर्थ, मानव जीवन का परम उद्देश्य , जीवन की सार्थकता, मानव की आध्यात्मिक उन्नति, को लेकर सनातन काल से लेकर आजतक जितने गहन, गंभीर, तात्विक, यथार्थ, त्यात्मक, सारगर्भित, चिंतन मनन, विश्लेषण, समीक्छा, हुई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है, जो मनुष्य मात्र के सर्वांगीण विकास के लिए, उसकी आत्मिक, आध्यात्मिक, सांसारिक, चारित्रिक, नैतिक, सार्वभौमिक, उन्नति के लिए और मानव जीवन के चरम लछ्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है, इसमे जीवमात्र के लिए छमा, दया, करुणा, प्रेम, शहिष्णुता, उपकार, सम्मान, का सन्देश है, हिंदुत्वा एक विशाल गहन सागर के सामान है, अनेकों सुन्दर, मोती है, सनातन कल से अनेकानेक, पवित्र, पवन नदियों के इसमे मिलते रहने से इस महान सागर का निर्माण हुआ है, हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो विश्व को समेत धर्मों का आदर करना सिखलाता, उस परम पिता परमात्मा के समस्त को स्वीकार करता है उसके समस्त रूपों को चाहे वह साकार हो चाहे वह निराकार हो, मान्यता देता है. उसे प्राप्त करने के सभी उपासना पद्धतियों सभी मार्गों को यथा कर्म मार्ग भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग, को सामान रूप से स्वीकार करता है, ये एकमात्र ऐसा धर्म इस संसार में है जिसका किसी से विरोध नहीं है, ये विश्व के सभी सम्प्रदायों, मतों, उनकी उपासना पद्धतियों, उनके धार्मिक विश्वाशों को सम्मान देता है, ये मनुष्य को धार्मिक निषेधों से नहीं बंधता, ये इश्वर को निश्चित मान्यता और निश्चित स्वरूप में संकुचित नहीं करता को स्वीकार करता है, यह इश्वर हर आत्मा में देखता है, वह उसको आस्था, विश्वाश,सत्य, में देखता है, हिन्दू धर्म को जानने, समझने, के लिए कुछ एक बातें पर्याप्त नहीं है, कुछ लोग हिन्दू धर्म के बहरी रूप को देख कर, या इसके कुछ कर्मकांडों को देख कर निष्कर्ष निकल लेतें है जो सही नहीं है, जैसे मूर्ति पूजा के फीछे एक गहरा दर्शन है, में ज्यादा अभी कुछ नहीं कह सकता बस इतना अवश्य कहूँगा, की आज के इस संसार में जहाँ धर्म को लेकर लोग मारकाट, रक्तपात कर रहे है, भौतिकता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जहाँ हिंशा है द्वन्द है संघर्ष है, अशांति, है, अशष्णुता है, ऐसे दिग्ध मरू भूमि में हिंदुत्व की पवन फुहार की आवश्यकता है, दूसरी बात में यह कहना चाहूँगा की यदि आप दूसरों को मुसलमान बनाने की अपेक्छा, मुसलमानों को ही अच्छा इंसान बनाने की कोसिस करें तो यह आपका मानवता के लिए पवन योगदान होगा, आप आतंकवाद का विरोध करें, आप मुल्ला मौलवियों, और कट्टरपंधियों, को दूसरे लोगों के विरुद्ध जिहाद करना, नफ़रत करना न सिखाये. अरब, ईरान, इराक, के बारें में में कुछ नहीं कहता पर भारतीय महाद्वीप के मुसलमानों को यह बात स्वीकार करना चाहिए वह भी वैदिक सनातन परम्परा का एक अंग है, गीता, वेद, गंगा, योग, दर्शन, उपनिषद, राम, कृष्ण, वैदिक संस्कृति, से कही न कही उनका जुड़ाव, प्रेम, स्वीकार्यता, सम्मान, होना ही चाहिए, इससे कोई प्रभाब नहीं पड़ता की आज वह इस्लाम को अपना धाम मानतें है, इतना ही काफी है की कभी वह इसी परम्परा के अंग थे, ये सब उनके पूर्वजों की श्रष्टि है, क्या मुस्लमान बन जाने पर वियक्ति अपनी माँ को माँ मानाने से इंकार कर देगा, क्या वह अपनी माँ का अपमान करेगा, उससे घृणा करने लगेगा.
    इस्लाम मजहब एक ऐसा मजहब है जिसका एक अपना नेचर अपनी टेंडेंसी है.आज इस्लाम विश्व मई दूसरा कबसे बड़ा मजहब है.तो इसका कारन उसकी यही विशेष प्रवत्ति है.इसकी पूरी प्रेरणा, सभी संभव तरीके कुरान में निहित है. इस्लाम एक ऐसा मजहब है जो यदि कुछ मानवीय है तो वह केवल मुस्लमान के लिए ही है.यह धर्म बहुत ही असहष्णु और खतरनाक है . इस्लाम मई गैर मुस्लिमों के लिए दो ही रस्ते नियत किये गए है पहला यह की वह इस्लाम काबुल करें दूसरा यह की उन्हें कतल कर दिया जय . कुरान में कहा गया है की जो अल्लाह , उसके पैगम्बर (मुहम्मद ) और उसकी किताब कुरान पर इमान नहीं लता अर्थात इस्लाम कबुल कर मुस्लमान नहीं बन जाता वह “काफिर” है और अल्लाह का दुसमन है I. “अल्लाह उसे दोखज (नरक) में डालेगा.अल्लाह मुसलमानों को “जिहाद” के लिए उकसाता है.“जिहाद” का अर्थ है एक ऐसा युद्ध जो काफिरों (गैर मुसलमान, जो अल्लाह के दुसमन है जैसे हिन्दू , यहूदी ,क्रिस्टियन , आदि क्यों की यह अल्लाह उसके रसूल पर इमान नहीं लए) के खिलाफ उन्हें खत्म करने के लिए अथवा मुसलमान बनाने के लिए लड़ा जाता है. “जिहाद” अल्लाह को प्यारा है. इसलिए जिहाद करना मुसलमानों के लिए भूत ही पावन कर्तब्य बताया गया है. कुरान में विश्व को दो भागों में बांटा गया है एक दारुल इस्लाम और दूसरा दारुल हर्ब. दारुल इस्लाम वह स्थान होता है जहाँ हर इंसान को मुस्लमान बना लिया गया हो, और दारुल हर्ब वह स्थान होता है जहाँ गैर मुस्लमान यानि काफिर रहतें है.दारुल हार्प को दारुल इस्लाम में बदलना हर मुस्लमान का पवित्र धार्मिक कर्त्तव्य है. इसके लिए उन्हें जन्नत (स्वर्ग)में भेजा जायेगा. (ऐसा कुरान कहती है जो मुसलमानों का पवित्र धार्मिक ग्रन्ध है उसमे लिखा हर लफ्ज अल्लाह ने कहा है, अल्लाह ने मुहम्मद को कहा था और मुहम्मद जो अल्लाह का पैगम्बर यानि अल्लाह का पैगाम लेन वाला उसका रसूल है, और कुरान मई लिखी साडी आयतें आसमान से उतरी है यानि अल्लाह ने कही है इसलिए इसके एक भी शव्द पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, न कोई संसोधन किया जा सकता है और जो ऐसा करेगा वह काफिर घोषित कर दिया जाता है जिसकी एक ही सजा है की उसका सर कलम कर दिया जाये. मुस्लमान वही है जो कुरान, अल्लाह, मुहम्मद के बताये रस्ते पर चले, उनकी हर एक बात को बगैर कोई सवाल के आँख मूँद कर स्वीकार करे, सही -गलत, नीति -अनीति, धर्म -अधर्म, उचित -अनुचित, इन पर वह अपनी बुद्धि -विवेक से विचार नहीं कर सकता, ऐसा करने पर उसे काफिर घोषित कर दिया जाता है इसका सबसे अच्छा उदहारण सलमान रश्दी है जिन्होंने “सैटनिक वर्षेश” नामक किताब लिखी थी जिसका अर्थ है “सैतान की आयतें, उनका मानना है की कुरान मई ऐसी आयतें लिखी है जो अल्लाह नहीं सैतान की ही हो सकती है, इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें काफिर घोषित कर दिया गया, ईरान के शाह ने उनके सर पर करोड़ों रूपये का इनाम रख दिया, पूरी इस्लामिक दुनिया उनकी जान की दुसमन बन गए, सारी दुनिया में उनकी किताब प्रतिबंधित कर दी गए, वह अपनी जान बचने के लिए इस देश से उस देश छिपाते फिरते रहे) यही कारण है की मध्य कल में मुस्लिम आतताइयों, आक्रमणकारियों सुल्तानों, राजाओं ने सारे विश्व को मुस्लमान बनाने के लिए तलबार उठा लीं. और दारुल हर्ब को दारुल इस्लाम में बदलने के लिए सारी दुनिया को रौंद डाला. वह जहाँ भी जाते जो भी देश जीतते वहां गैर मुसलमानों पर भयंकर अत्याचार होते, बहुत बड़े पैमाने पर नरसंहार किया जाता, पूजा स्थलों को अपवित्र और नष्ट किया जाता, स्त्रियों और बालिकाओं से बलात्कार किये जाता, जनता को जबरन मुस्लमान बनाया जाता या गुलाम बना लिया जाता.और इस के लिए उस समय की इस्लामिक दुनिया द्वारा उनके ऐसे कृत्यों की प्रशंशा की जाती, उस समय के इस्लामिक वर्ल्ड का नेता जो खलीफा कहलाता था उन्हें गाजी की उपाधि देता. उनकी स्तुतियां होती. उनकी वीरता का वखान किया जाता. कुरान के मुताबिक वह स्वर्ग के अधिकारी थे. और ऐसे ही प्रयत्नो के द्वारा उस समय पूरे अरब, दच्छनी-पूर्वी एशिया, मध्य एशिया, दच्छनी योरोप और उत्तरी अफ्रीका आधे से विश्व को इस्लाम में कन्वर्टेड कर दिया गया.आज आधुनिक युग में भी सरे विश्व को मुस्लमान बनाने के प्रयत्न जारी है, आज हम जिसे आतंकवाद कहते है वह इस्लामिक दृश्टिकोण में जिहाद आज के इस्लामिक वर्ल्ड का एक बहुत बड़ा भाग वह भाग है जहाँ आज से 1000 वर्ष पहले हिन्दू बौद्ध धर्म का परचम लहराया करता था. आज जो इस्लामिक देश है जैसे अफगानिस्तान, पाकिस्तान. बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और भारत में कश्मीर और शेष भारत की मुस्लिम आबादी ये सब कभी हिन्दू अथवा बुध हुआ करते थे. यदि इस्लाम न होता तो आज हिन्दू जनसँख्या विश्व में सर्वाधिक जनसँख्या होती. और अफ्गानस्तान. पाकिस्तान, बांग्लादेश ये सब भारत के ही हिस्से होते. और आज भारत छेत्रफल में चीन से भी बड़ा देश होता. इस्लाम बढ़ता यहाँ और भारत सुकुड़ता गया. जहाँ -जहाँ हिंदुत्व समाप्त हुआ वहां-वहां भारत ख़त्म हुआ हैI. इसे शिध्द करने की आवश्यकता नहीं है भारत का अर्थ हिंदुत्व और हिंदुत्व का अर्थ भारत है. आज भी विश्व के किसी भी कोने में जहाँ हिन्दू पहुंच कर बसता है, वहां एक भारत बसता है, और इसके विपरीत भारत में ही जहाँ हिन्दू ख़त्म होते है वहां भारत ख़त्म होता है.वह हिस्सा भारत से अलग होने होना चाहता है. जैसे कश्मीर. हिन्दू ख़त्म होते रहे और भारत सिकुड़ता गया. और ये सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है.संसार के बहुत बड़े भाग में हिदुत्व इस्लाम का ग्रास बन चूका है. भहुत बड़े भागों में हिंदुत्व का पूरी तरह सफाया कर दिया गया है. और जहाँ धोड़े-बहुत अवशेष बचे है उन्हें भी सहन नहीं किया जा रहा है उनको पूरी तरह सफाया करने के बहुत तेजी से और निरंतर प्रयत्न हो रहे. और सबसे बड़ी बिडम्वना यह है की हम आज भी नहीं चेत रहे है. हमें न इस बात का आभास है, न ही कोई चिंता, हम अपनी-अपनी जिंदगियों में ही मगन है. इसका सबसे बड़ा कारण है की हिन्दुओं में आपने धर्म को लेकर कोई स्वावभिमान नहीं है.दूसरी हिन्दुओं मई भहुत ही गलत धारणाएं और विश्वाश फैले हुए हैं. वह इस्लाम की वास्तविक प्रकृति से अनभिज्ञ है. उसने कभी इस्लाम को जानने की कोसिस नहीं की.उसने तो सदा से यही जाना है यही सीखा है की सब धर्म अच्छे होतें है. सब धर्म अच्छी शिक्षा देते है. सब धर्म सामान है.(इसके विपरीत इस्लाम केवल खुद को ही सच्चा मजहब मानता है और इस के अलावा किसी बात को स्वीकार नहीं कर सकता)उसने कभी कुरान नहीं पड़ी पर वह कहता है गीता और कुरान सामान है (जबकि दोनों बिलकुल भिन्न प्रकृति के है जहाँ गीत एक भूत ही उच्च कोटि का आध्यात्मिक, दार्शनिक ग्रन्ध है जो साडी मानव जाति के लिए सन्देश देता है, वाही कुरान की प्रकृति एक सविधान की तरह है जो केवल मुसलमानो के लिए नियत किया गया है, ये केवल उनके लिए ही है, इसमे केवल उनके लिए ही निर्देश है. आदेश है सन्देश है,)

  3. swamji laxmishankrachay ji, aapko hindu scholar likha gaya hai, kya aap hindu scholar hai, ye bade aashcharya ki bat hai. aap hindu dharm, jo vaidik satya sanatan dharm hai, aap use nahi jante, yadi aap janten hai to kya aap yah kah sakten hai ki es dharm ke samne islam ko kahi rakha ja sakata hai, ek dharm jisne iswar ko sabse aadhik samchha hai, eswar ke samvand mai kitni vistrit samikchha, kitni uttat nishkarsh, kitnee adhik mimasa, kitna sundar chitran, kitne vaighyanik tark diye, gaye hai, use sakar bhi hai, vah nirakar bhi hai, vah anadi hai, vah annat hai, vah sarvyapak hai, vah kan-kan mai hai, vahi aatma hai vahi parmatma hai, uske bare mai koi ek tharna rakhna galat hai. vah tharnao, vicharon, budhdhi se bhi pare hai, vah aanubhoot kiya ja sakta hai, nirmal man, sadkarm, pavitratma, uttam vishvas dawara use paye ja sakta hai, use kisi ek paribhasha, adhwa nischit dharnao mai nahi bandha ja sakta.uske aage islam ka eswar kya hai, jo aapne muh se apni tariph karta hai, jo hame darata hai, jo ek vishesh sampraday ka himaytee hai, jo dhamkiyon deta hai, narak ka bhay diklata hai, jo hamen lalach deta hai swarg mai aurten uplavdh karane ka pralobhan deta hai, jo hame phuslata hai, jiske kewal musalman hi dost ho sakaten hai, banki sab kaphir hai, vah musalmano ko uskata hai ki vah hamara katl kar den, ye kitna chhaota, kitna sankuchit, kitna seemit, eswar hai kya aisa allah kbhi sachch eswar ho sakta hai, muhammad kya hai, uski naitikta, uske vichar ka dayara, uski soch, uska irada sab kuch to kuran padane se jahir ho jata hai, poori kuran ka 80 pratishat bhag mai to yahi baten likhi hai, bhki bache kuch bhag mai musalmano ke liye kayade kanoon likhen hai, aapradh ki sajayen likhi hai, jaies chori karne par hadh kat liye jay, vyabhichar karne par sabke samne paththaron se mar-mar kar mardala jay, sakahari jeevon ka mass khaya jai, unko kaise halah (vadh, hatya,) kiya jay, aurton ko kis prakar rakha jay, aur kuch banen kuch baten jine achcha kaha ja sakta hai vah bhi hai ki kaise soude ko tola jay, tarajoo ko seedha pakra jay, swamaji hindutw aur eslam mai aapko antar nahi dhikta, kya hidutw jo ek pracheen manav dharm hai, janha manushya jeevan ka uddeshy moux vataya gaya hai, janha dharm, aatma, parmatma, jeevan, jeevan ka aarth, jeevan ka uddeshy, ko likar kitnee gahan gambheer, sameexayen, mimansayen, vichay kiye gayen, es dharm ke aagen eslam hai kya, aur es islam ka pareenam kya hai, yah jise ham itihas mai dekh sakate hai vartman mai dekh sakten hai, aatankvad , hatya, katrta, hinsha, doosare dharmon ke prati ashashnuta, atyachar, napharat ke roop mai, jo prtaxya hai use kya praman, eske vipreet hindu dharm, sabhi dharmon ke samanta ki bat karta hai, sabhi upasna padhtion ko samman deta hai, eswar ke har roop ko manyata deta hai, dharm ko lekar yaha kahi koi durbhavna nahi hai, hindutw ne eswar ko kitna vishtrit roop mai jana hai, aur eslam ne eswar ko kitna seemit, kiya hai, kitna sankuchit kar diya hai. sanchhep mai islam ki upma maroobhoomi ke aise bhag se kee ja sakte hai jismen charon taraph tapati ret bikhari hai jisko charon taraph se unchee-unchee kateelee bad se kher diya gaya ho, jiske aundar jabarjasti logon ko kheech liya jata hai aur phir unke bahar jane ke sare raste band kar diye jate hai, bahar se koi hava undar nahi aa sakti, na hi andar se koi bahar dekh sakta hai, na bahar se kuchh le sakata hai, yadi usne aisa kiya to use mardala jata hai, is maroo digdh bhoomi ke beechon-beech ek uncha khajoor ka ped laga hai, jiske ware mai bataya jata hai ki ped kewal yahi hota hai eske siwa aur koi ped nahi haota hai banki sab jhooth hai, phal kewal khajoor hota hai banki koi phal nahi hota hai, kewal yahi meetha hota hai banki sab karva hota hai. eske alawa aur kuchh janne-sochne ke jaroort ki to kuphr hoga. tumhar katl kar diya jayega iske vipreet sanatan dharm aisee maru hindutw ek aisa upvan hai janha na-na prakar ke, alag-alag rangon ke, sundar panchhi chahakten hai. janha aam, peepal, santra, sev, angoor, leechi, jitne bhi prakar ke ped vishv mai hoten hai sab lage hai, aur khajoor ka ped bhi, yahan kaha jata hai sabhi ped hai, sabhi ped achchhe hoten hai, sabhi phal swashkar hoten hai, sabka apna-apna swad hai, yah upvan khula hui yanha sabka swagat hai, yahan bahar dekha ja sakta hai, jaya ja sakta hai, yahan seetal vayu sada pravahit hotee rahtee hai, yahan seetal jal ki nadiyan nirantar pravahit hoti rahti hai, yahan log unmukt hokar khoomten hai, sabhi prakar ke phalon ka swad leten hai, sabhi pedon ko ped manten hai, par dikakat yah hai ke es sundar udyan ko hajaron varshon se nirantar nast karne ke pryatn ho rahe hai, yahan us maru registan se log aaten rahe hai, ese bar-bar ujara jata hai, pedon ko kat diya jata hai, lataon ko nast kar diya jata, hai yahan rahane walon ko, jaheel kahajata hai kyaon ki bo santipriye hai, unko mara jata hai aur jabarjasti pakarkar, us bade me band kar diya jata hai, deere deere bahut se ped kat dale gaye hai unke jaron me matha dala ja raha hai kyonki ped to kewal ek hi rahna chayiye, jo hai khajoor ka ped vahi sachcha ped hai, kewal usi ka phal meetha hota hai, aur kisi ko ped nahi kaha ja sakata, isliye inhe nast kardo, jahan vo jabarjasti nahi kar pate vaha lalach diya jata hai. yahan aao, yahan tumhe khajoor khane milega, yahi kewal meeth phal hota, banki sab chhoot hai, kuphr hai. yadi tum yah baat nahi mante to tum nark mai dal diye jaoge, dojakh ki aag mai jaloge, sochne wali bat yah hai ki koi bhi vyakti, disme thori bhi samajh hai, es sundar upvan ko chhorkar jaha sabhi ped lagen, hai janha sabhi prakar ke phool aur phal hai, khajoor ka bhi ped bhi yahan hai, koi vyakti us mroo bhoomi mai apni ichcha se kyon jayega. koi maha moorkh hi aisa kar sakta hai, ya koi pagal jismen sahi galat mai bhed karne ki sakti hi n ho,

  4. Yes, VIVEK KUMAR CHOUBEY has sent two posts. One is likely in Hindi (?) and the other in Roman Urdu/Hindi mix. It is all against the OP about the lecture of Hindu Scholar Swami Lakshmi Shankaracharya.
    VIVEK KUMAR CHOUBEY has not liked that lecture in praise of the prophet Muhammad (In Peace).
    English translation of VIVEK KUMAR CHOUBEY writing is necessary to fully understand the material.
    I have a booklet (in Urdu) which is the translation of the lecture in English delivered by another Hindu specialist Professor Krishna Rao. The title of the book is “Dunya kaa sabb say azeem Insaan” i.e. “The greatest man of the world.”
    The lecture in English had been translated to Urdu by Zakriya Virk sahib.
    In that lecture, professor Krishna Rao sahib has done justice and honestly described the high level qualities of the Prophet of Arabia. It is worth reading and I had seen the original lecture in English on this forum too.
    People are paying tributes to the prophet Muhammad s.a.w.s. professor Krishna Rao has mentioned many names.
    VIVEK KUMAR CHOUBEY needs to read more about real Islam from the school of Ahmadiyah teachings. All doubts will be removed. Prophet Muhammad recognized the great saints and prophets of India. Hinduism is a complete religion in that it has all the rituals from birth to death.
    We Ahmadi Muslims Love (Lord) krishan sahib and Raam sahib as great leaders of the Hindus religion. We do not consider the peaceful Hindus as Kafir.

  5. Kaafir

    Arabic word Kaafir (كافر) is the Gerundial form of a noun according to Arabic Grammar. which means refusing or denying.The verb root letters for this word is “ka fa ra = كَ فَ رَ” which means in English Language to refuse or to deny.

    The Qur’an is a message sent to the Earth from the God Almighty; the Extraterrestrial Source which is not a human work.

    this makes a clear division between the humanity in two sections. The first, those who accept it and the second, those who refuse it.

    God Almighty says in His message every body will die and will come to Me. God Almighty says that all the souls will be gathered before him on the day of Judgement so today you are refusing my message and me and that day you will be refusing (kaafir / takfuroon ) to those things that you are accepting or believing in this life.
    According to Arabic Grammar “kaafir” word has been used to deliver the meaning of denial without any prejudice.
    The antonym of the word ” kaafir” (one who denies) is “Mo’min” (one who accepts).
    The God Almighty says in His message” we have guided you the right path either you accept(thankfully)it or deny it – The Human:3″
    it is up to a human what is he judges good for his soul. Neither Allah nor a muslim forces any human to come to Islam or to be a muslim.
    I am a Master of Arabic Language and Literature and work and live in Middle East.
    best regards

  6. Dear Ahmad khan sahib, with due respect to you, I need to present my few words. You are right about meaning of Kufr i.e. denying, not accepting. That is the Arabic dictionary meaning. Kufr starts with denial.
    But where does it end up. It can extend into complete violence and war mongering, killing, politics.

    THE BELIEVING KAFIR.
    ——————-
    In the last section (Ruku’u) of Para 3 of Quran, we read and find two types of Kafir (Believing Kafir). One group of believers is just gentle group who deny the messenger even though they had observed that he was right and even though the messenger had shown them all the signs (Ayaat, Bayyanaat). Such people are warned with the curse of Allah, angels and men and there is a severe warning of hell punishment for them EXCEPT those who come back (Taaboo) and correct themselves. There is help for them that Allah will forgive them.
    In the next verse are described those believing Kafir who increase in their Kufr. Those are also apparently Momineen who deny the messenger and raise havoc against peaceful Muslims by entering their mosques to erase the Kalimah Tayyabah. They enter into the Muslim graveyards and desecrate their graves//
    I hope this is enough for now, I will describe the rest of some important matter in next post/
    Please consider my points,,,, Thanks.

    He may be a Muslim or a Jew or a Christian or Atheist,

  7. I READ VIVEK CHAUBEY’S COMMENT FULLY,
    HE IS REALLY A COMPLETE IGNORANT ABOUT ISLAM AND QURAN AS WELL AS HIS OWN RELIGION HINDUISM. HE ADVOCATED HINDUTVA WHICH IS COMPLETELY A FABRICATED IDEA OF SOME DHONGI SADHUS OF ANCIENT TIME FOR THEIR SELF INTEREST AND STILL ALIVE DUE TO SOME POWER LOVING, SELFISH, FAKE AUTHORITIES LIKE RSS AND ITS ALLIES. ONE SHOULD KNOW THAT HINDUTVA IS COMPLETELY AGAINST THE REAL RELIGION ‘SANATAN DHARMA’. VIVEK SHOULD GO THROUGH VEDAS THE ACTUAL SOURCE OF HIS RELIGION.
    HIS FALSE, PROVOCATIVE AND LIES ABOUT QURAN AND ISLAM PROVES THAT HE IS NOTHING OTHER THAN THOSE WHO BELONGS TO THE ORGANISATIONS LIKE RSS. HIS AIM IS ONLY TO SPREAD RUMORS AND FALSE PROPAGANDA ABOUT ISLAM AND QURAN SO THAT,A COMMON HINDU CAN MAINTAIN HIS HATE AGAINST ISLAM.

    HE SAYS QURAN IS FOR MUSLIMS ONLY, THIS ILLITERATE SHOULD KNOW THAT QURAN BEGINS WITH “ALL PRAISE IS FOR ALLAH WHO SUSTAINS THE ENTIRE UNIVERSE.” HERE IT SHOULD BE NOTICED THAT ‘SUSTAIN’ NOT ONLY MUSLIMS RATHER ALL HUMANS, NOT ONLY HUMANS RATHER ALL ANIMALS, NOT ONLY ANIMALS RATHER ALL LIVING THINGS, NOT ONLY LIVING THINGS RATHER COMPLETE EARTH, NOT ONLY EARTH RATHER COMPLETE SOLAR SYSTEM, NOT ONLY THIS SOLAR SYSTEM RATHER COMPLETE GALAXYS, NOT ONLY A GALAXY RATHER ENTIRE UNIVERSE. THE “RABBUL AALAMEEN” CONTAINS ALL THESE THINGS.
    IF START TO EXPLAIN THE WORDS OF THE QURAN “RABBUL AALAMEEN” THEN IT WILL BE FINISH IN A COMPLETE BOOK OF SOME HUNDRED PAGES. THE IGNORANT PEOPLE LIKE VIVEK CAN NEVER REACH TO MINIMUM OF QURAN’S TEACHINGS AS IT NEEDS A HIGH UNDERSTANDING AND HELP OF SOME NOBEL ISLAMIC SCHOLARS.
    QURAN ADRESSES THE PEOPLE IN TWO MANNERS, ONE START WITH “YA AYYO-HAL AL-NAAS” i.e. ‘O HUMAN BEINGS, O MAN KIND’. ANOTHER VERSE BEGINS WITH “YA AYYO-HAL LAZINA AAMANOO” i.e. ‘O BELIEVERS’, SO VIVEK’S ALLEGATION THAT QURAN TALK ABOUT ONLY MUSLIMS IS COMPLETELY BASED ON HIS IGNORANCE.
    HIS ANOTHER ALLEGATION ON QURAN IS THAT IT PROVOKES THE MUSLIMS TO KILL KAFIRS. FIRST HE SHOULD KNOW THE MEANING OF KAFIR, IT MEANS ONE WHO DENY OF EXISTENCE OF GOD. IN YOUR RELIGION THEY ARE CALLED AS ‘NASTIK’. THE PURPOSE OF STABLISHMENT OF ISLAM IS TO EDUCATE PEOPLE ABOUT ALLAH AND HIS COMMANDMENTS, SO THAT THE LIFE OF EVERY HUMAN BEINGS SHOULD BE PEACEFULLY AND BASED ON SOCIAL JUSTICE, SIMULTANEOUSLY THEY MUST GO INTO HEAVEN AFTER ENDING OF WORLDLY LIFE i.e.AFTER DEATH. IN THIS EFFORT IN THE FIRST 14 YEARS OF MUHAMMAD (SAW) AND HIS COMPANIONS HAD BEEN HUGELY HUMILIATED BY THE NON-BELIEVERS OF MAKKA,MUSLIMS NEVER REPLY WITH ANY OFFENSE. A LARGE NUMBER OF INNOCENT MUSLIMS HAVE BEEN PUNISHED INHUMANLY EVEN KILLED IN MAKKA. LASTLY AN ORDER CAME FROM ALLAH TO MIGRATE ANOTHER PLACE MADINA. WHEN MUSLIMS CAME IN MADINA AND LIVING PEACEFULLY THEN AGAIN NON-BELIEVERS MAKKKA ATTACKED THEM IN THEE CITY OF MADINA IN THE 2ND YEAR OF MIGRATION AND AGAIN IN THE 3RD YEAR OF MIGRATION AND AGIAN IN THE 4 YEAR OF MIGRATION RESPECTIVELY. NOW MY ONE QUESTION TO MR. VIVEK AND PEOPLE LIKE HIM, SHOULD MUSLIMS NOT RAISE WEAPONS AGAINST THESE OFFENCES?? IS IT INJUSTICE TO DO WAR AGAINST THEM?? HOW FAR MUSLIMS SHOULD TOLERATE VICTIMISATIONS??
    AT THIS INSTANCE ALLAH HAS SENT DOWN THE VERSE ABOUT FIGHT AGAINST THE WRONG DOERS AND THEY HAVE BEEN IDENTIFIED AS ‘KAFIRS’ AND THE WAR IS CALLED AS ‘JIHAD’.
    EVEN TODAY THE COMMAND IS STILL PRESENT FOR THOSE WHO ARE THE ENEMY OF HUMANITY, WHO CAUSES ATROCITIES TO THE INNOCENT PEOPLE AND WHO RESISTS THE SPREAD OF PEACE MUST BE DEALT WITH WEAPON i.e. JIHAD.

    ISLAM NEVER PERMITS TO KILL THEM WHO DO NOT BELIEVE IN ISLAM NEITHER ADVOCATES A FORCED CONVERSION OF ANYBODY INTO ISLAM RATHER QURAN HAS GIVEN A GOLDEN FORMULA TO LIVE OTHERS “FOR YOU IS YOUR RELIGION AND FOR ME IS MY RELIGION” (chapter no. 109, verse no. 6). IN ISLAM FORCED CONVERSION IS A BIG SIN AND NOT ACCEPTABLE. UNLIKE YOUR HINDUTVA AGENTS WHO ARE DOING FORCED CONVERSIONS ON GUN POINT OR IN LURE OF SOME MONEY.

    VIVEK HAS SUPPORTED RASCALS LIKE SALMAN RUSHDI, HE IS A MORON, INDIAN WRITER CHETAN BHAGAT HAS ALREADY TOLD ABOUT HIM THAT HIS LITERATURE IS NOTHING BUT IS ONLY FAMOUS DUE TO WRITING AGAINST ISLAM. HE HAD A DEAL WITH JEWS AND CHRISTIAN FOR HIS WRITING. ANYWAY YOU SHOULD NOT FORGET WORLD FAMOUS PAINTER MAQBUL FIDA HUUSSAIN WHOSE SOME PAINTINGS ABOUT HINDUS DEITIES CAUSED HIS EXILE TILL DEATH. WHY DIDI NOT RAISE YOUR VOICE IN FAVOUR OF FIDA HUSSAIN?? OR WHY HINDUS DID NOT TOLERATE JUST A PAINTINGS?? EVEN A WRITER HAS BEEN KILLED DUE TO WRITINGS A TRUE POINT OF HINDU RELIGION IN RECENT DAYS.

    FINALLY I WOULD LIKE TO REQUEST MR. VIVEK TO IMPROVE YOUR KNOWLEDGE AND UNDERSTANDING ABOUT QURAN AND ISLAM AND GIVE THIS BAD HABIT OF SPREADING FALSE PROPAGANDAS.

  8. BROTHER VIVEK PLEASE LEARN ABOUT ISLAM AND ALSO GO THROUGH YOUR RELIGIOUS BOOKS AND THEN TALK ABOUT ISLAM, QURAN SHAREEF AND HAZRAT MUHAMMAD ( PEACE BE UPON HIM).I THINK BROTHER YOU EVEN HAVE NOT READ YOUR BOOKS.

  9. PEOPLE AROUND THE WORLD MOSTLY JEWS AND CHRISTIANS HAVE THEIR SELF MADE WORST CONCEPT ABOUT ISLAM BUT NOT BY COMPLETE UNDERSTANDING OF LESSONS OF ISLAM AND THE GREATEST MAN WHO HAVE EVER INHABITED THIS EARTH THAT IS HAZRAT MUHAMMAD (PEACE BE UPON HIM).THAT IS NOT MISFORTUNATE FOR US BUT FOR THOSE PEOPLE WHO ARE AGAINST THE TEACHING OF ISLAM.IT IS NOTHING BUT “THE ISLAMOPHOBIA”. THIS DISEASE SPREADS ALL AROUND THE WORLD THROUGH WESTERN COUNTRIES .EVEN PEOPLE IN INDIA ARE ALSO SUFFERING FROM THAT PARTICULAR DISEASE.

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